चिंतन करते चलो, बंधुओं चिंतन करते चलो
रक्त कणों से मातृभूमि का सिंचन करते चलो ..... बंधुओं चिंतन करते चलो
वर्तमान के परिवेश में, स्थितियाँ गंभीर हैं
अरि हस्तों से खींच रहा, अब मातृभूमि का चीर है
जन्मभूमि रक्षार्थ तन, मन अर्पण करते चलो ..... बंधुओं चिंतन करते चलो
रक्त हो गया नीर हमारा, भूल गए हम कौन हैं
माँ की पीर बड़ी गंभीर है, फिर भी हम सब मौन हैं
समय आ गया अरि दल अब, तर्पण करते चलो ..... बंधुओं चिंतन करते चलो
देश, समाज, धर्म की सोचें, इसी में तो अस्तित्व है
चिंतन करें कि अपना-अपना बनता क्या दायित्व है
पावन माती पूजो शत-शत वंदन करते चलो ..... बंधुओं चिंतन करते चलो
'संघे शक्ति कलौ युगे', यह गीता ने बतलाया है
जीवन होम दिया पुरखों ने, सत्य कर दिखलाया है
संघ शरण में राष्ट्रहित, संगठन करते चलो ..... बंधुओं चिंतन करते चलो